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कब्बडी के खेल जैसा है जीवन और राजनीति।

   लेख:-

दिनांक 11।06।2018

वाराणसी।कबड्डी एक ऐसा खेल है, जो मुख्य रूप से भारत में खेली जाती है। कबड्डी नाम का प्रयोग प्राय: उत्तर भारत में किया जाता है, इस खेल को दक्षिण में चेडुगुडु और पूरब में हु तू तू के नाम से भी जानते हैं।
किन्तु कब्बडी भारत लोकप्रिय खेल क्यों है ये स्वयं के अनुभव, राजनीतिक उठापटक और समाज के स्वभाव से पता चलता है।
दरअसल कब्बडी खेल नही बल्कि कौशल है।
कब्बडी का खेल हमे सिखाता है कि जब हम जीतोड़ मेहनत, दृण निष्ठा और लक्ष्य प्राप्ति के लिए संकल्पित होकर मंजिल के ओर बढ़ते है तो लोग हमारे तांग खिंच कर हमें अपनी मंजिल की ओर जाने से रुकते है और हमारे अपने लोग दूर बैठ कर तमाशा देखते है।
अगर हम विरोधी के पाले से खेल जीत कर खुद के पाले में पहुच गए तो हमारे अपने पूरे समूह को बहादुर और विजेता बताकर सफलता का श्रेय लेते है, और गर हम विरोधी के पाले में धरासायी होकर लौटते हैं तो हमारे अपने सौ कमियां निकालकर समुह की हार का जिम्मेदार हमे ठहराते है।

खैर बचपन मे खेले कब्बडी का खेल ताउम्र हमारे जीवन मे घटित होता रहता है।
कुछ ऐसा ही खेल आजकल हमारे देश की राजनीति में भी चल रहा है।
एक ओर पूरा विश्व आज भारत की सराहना कर रहा है, विश्व की सभी महाशक्तियां हमे गले लगाने तो आतुर है, देश बहुत तेजी से विकाश की ओर निरंतर अग्रसर है, अंत्योदय का सुंदर स्वप्न साकार होने के कगार पे खड़ा है।
नरेंद्र मोदी जैसा कर्तव्यनिष्ठ नेतृत्व देश की चुनौतियों, बढ़ाओ, दुश्मनों व षड्यंत्रकारी से जूझ रहा है, वही दूसरी ओर देश के भीतर मौजूद अनेक राजनीतिक दल उसे रोकने, गिरने व असफल करने के लिए किसी भी हद तक गिरने को तैयार है।
नरेन्द्र मोदी जी ने भी बचपन मे कब्बडी जरूर खेला होगा, तभी तभी तो सभी चुनौतियों व बाधाओ को चीरकर मंजिल तक पहुचने का शानदार कौशल उनके पास मौजूद है।

लेखक:-
श्री संदीप  चौरसिया(राजनीतिक विश्लेषक,व् वरिष्ठ पत्रकार है)

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