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कठिनाइयों से भरा रहा एक अधिवक्ता की राजनिती का सफर:-

 शैलेन्द्र पांडेय “कवि” के कलम से✒

 

दिनांक 14।06।2018

 

वाराणसी।कहा जाता है कि जीवन का कोई भी लक्ष्य आसान नहीं होता लेकिन किसी में कुछ कर गुजरने की हौसला हो तो जीवन में कुछ कठिन भी नहीं होता ऐसे ही लफ्जों में एक ऐसी शख्सियत जो 18 महीने पहले एक अधिवक्ता के रूप में पहचान बनाने और अधिवक्ता समस्या के लिए कार्य कर रहे थे। उस शख्सियत ने 15 महीने में अपने मेहनत और परिश्रम के बल पर पूरे पूर्वांचल नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में अपने उत्तम कार्य शैली और अपनी तकनीक और राजनीति में अपने हौसले के बल पर एक नई पहचान बनाई है उस शख्स का नाम डॉ नीलकंठ तिवारी जो कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में विधि न्याय सूचना खेलकूद और युवा मामले के राज्य मंत्री हैं। मंत्रालय के पहले मैं इस शख्स के राजनीतिक सफर पर प्रकाश डालने की बात करूंगा एक मध्यम वर्गीय परिवार में और शिक्षा के बल पर यहां तक पहुंचे डॉक्टर नीलकंठ तिवारी का राजनीतिक सफर कुछ लोगों के मन में यह शंका जरूर डालता है कि आखिर है यह कौन है ? लेकिन राजनीति के माहिर रणनीतिकार और युवाओं की नब्ज समझने वाले डॉक्टर नीलकंठ तिवारी का जन्म राजनीति के हिस्से मैं जरूर केवल 15 महीने का सफर तय किए हैं ,लेकिन राजनीति को समझने और चीजों की परख रखने वाले डॉक्टर नीलकंठ तिवारी पिछले 30 वर्षों से राजनीति के धुरंधरों में गिने जाते रहे 1989 से छात्रसंघ महामंत्री के रूप में अपने राजनीति की शुरुआत करने वाले डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने हरिश्चंद्र महाविद्यालय वाराणसी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का बीज लगाकर बहुत सारे छात्र आंदोलन और पूरे बनारस की राजनीति पर अपनी भूमिका और अपनी मजबूती का एहसास युवा वर्ग में कराया भारतीय जनता युवा मोर्चा का सफर 1998 में शुरू तो हुआ लेकिन सन 2000 में महानगर की कमान संभालने वाले युवा मोर्चा के अध्यक्ष डॉ नीलकंठ तिवारी वर्तमान में परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को एक कार्यक्रम के माध्यम से अपनी मजबूती का एहसास कराया था जो तत्कालीन भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी थे आज के वर्तमान दौर में जहां सन 2004 में मात्र 32 साल की अवस्था में पूरे पूर्वांचल की सबसे बड़ी बार का चुनाव लड़कर जिस मजबूती का एहसास एक अधिवक्ता के रूप में डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने कराया कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं को युवा अधिवक्ताओं की राजनीति में दखल रास नहीं आया और 15 साल और 25 साल की प्रैक्टिस में डॉक्टर नीलकंठ तिवारी को रोकने का प्रयास किया गया यहां भी समय पीछा करने में डॉक्टर नीलकंठ तिवारी को 10 साल तक की प्रतीक्षा कराई और 2014 के सेंट्रल बार में 15 साल की प्रेक्टिस पूरा करने के बाद जब चुनाव लड़े तो सेंट्रल बार की कुर्सी एक युवा अधिवक्ता को 120 साल के सेंट्रल बार के इतिहास में सबसे कम उम्र के अध्यक्ष के रुप में दर्ज कराई थी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसदीय चुनाव में चुनाव लड़ने के अवसर पर एक अधिवक्ता के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी। किसे पता था यदि राजनीति कुछ और कह रही है और 24 जनवरी 2017 को डॉ नीलकंठ तिवारी को वाराणसी की आत्मा कहे जाने वाली दक्षिणी विधानसभा से भाजपा उम्मीदवार के रूप में टिकट दिया गया तो पूरा उत्तर प्रदेश यह जानने की कोशिश करता रहा कि डॉक्टर नीलकंठ तिवारी आखिर हैं कौन पत्रकारिता विधि में मास्टर और दर्शनशास्त्र में पीएचडी करने वाले नीलकंठ तिवारी एक योग्य छात्र के साथ साथ छात्र राजनीति अधिवक्ता राजनीति संगठन की राजनीति में अपनी अमिट छाप छोड़ने तथा अपनी दूरदर्शिता अपनी ईमानदारी और अपने कठिन व्यवहार और निर्णय लेने की क्षमता के लिए युवाओं में बहुत लोकप्रिय रहे अपने अधिवक्ता प्रेक्टिस के दौरान छात्र नेताओं के निशुल्क मुकदमा लड़ने वाले श्री तिवारी 2018 के बार काउंसिल के प्रत्याशी हो सकते थे लेकिन प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था जिस अधिवक्ता हितों के लिए बार कौंसिल का चुनाव लड़ना चाहते थे उन्हें उसी अधिवक्ताओं की सेवा करने के लिए और युवाओं की सेवा करने के लिए कानून न्याय और युवा खेलकूद जैसे विभाग इस सरकार में प्राप्त हुए। कहा जाता है की राजनीति में किस्मत और कर्म दोनों की आवश्यकता होती है लेकिन 28 साल के कठिन परिश्रम और राजनैतिक समझ ने डॉक्टर नीलकंठ तिवारी की प्रसिद्धि और कई बार के विधायक श्यामदेव राय चौधरी के विकल्प के रूप में और अपने सादगी और सरलता को राजनीति में बड़े हथियार के तौर पर जनता के बीच में अपनी एक अच्छी पैठ बनाने काम किया है और भारतीय राजनीति में एक ऐसे शख्स ने जिम्मेदारी ठीक तरीके से संभाल ली है जिस शख्स के बारे में टिकट मिलने के बाद कई प्रकार की टिप्पणियां होती थी आज अपने सुभम व्यवहार और कार्यशैली के वजह से वह कठिन बातें काफी पीछे छूट गई हैं!!!

✒लेखक हरिश्चंद्र महाविद्यालय के छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष तथा एक अधिवक्ता हैं ।

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