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प्रचार के निम्न स्तर, अभद्र मर्यादित भाषा, धार्मिक व जातिवादी समीकरण व तमाम तोड़-जोड़ के साथ गुजरात विधानसभा चुनाव सम्पन हो चुका है,

दिनांक १४-१२-२०१७

 

प्रचार के निम्न स्तर, अभद्र मर्यादित भाषा, धार्मिक व जातिवादी समीकरण व तमाम तोड़-जोड़ के साथ गुजरात विधानसभा चुनाव सम्पन हो चुका है,
अब गुजरात समेत पूरे भारत को 18 दिसम्बर को आने वाले परिणाम का बेसब्री से इंतजार है।
ये बेसब्री लाजमी है क्योंकि गुजरात विधानसभा के चुनाव परिमाण आगामी 2019 के आम चुनाव की तस्वीर साफ करेगी,
ये चुनाव परिणाम और भी कई तरह से अहम है, ये परिणाम देश को ये बताएगा कि देश जातिवाद के दंश के उभर कर नए राष्ट्र निर्माण की तरफ जाता है या फिर जातिवादी व आरक्षण की आग में खुद को आहूत कर देता है,
ये परिणाम बताएगा कि बनावटी आवरण व दुष्प्रचार के जाल में फसेंगे या विकाश की नई इबादत लिखेगा।
गुजरात भारत का एक समृद्ध राज्य होने के साथ भारत के व्यापार का एक मुख्य केंद्र है, विगत दिनों भारत सरकार द्वारा देश भर में एक कर प्रणाली जीएसटी लागू की गई है, जिसका देश भर विपक्ष द्वारा विरोध किया गया था, विपक्ष का मानना है कि नोट बंदी व जीएसटी से देश की जनता व व्यापारी परेशान है जिसका जवाब वो गुजरात विधानसभा चुनाव में देने वाले है,
ये परिणाम स्पष्ठ कर देगा कि देश का व्यापारी वर्ग जीएसटी से संतुष्ठ है या असंतुष्ठ,
गुजरात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गृह राज्य भी है इसलिए ये परिणाम उनकी भी प्रतिष्ठा व चार साल के कार्यकाल से जोड़ के देखा जा सकता है,
बहरहाल परिणाम चाहे जो भी हो पर बीते दिनों गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान राजनीति भारत के इतिहास के सबसे निम्न स्तर पे जा गिरी, जातिवादी आंदोलन, मर्यादित भाषा और बनावटी धर्मिक आवरण के साथ साथ पाकिस्तान तक का जिक्र सत्ता के लोभ को बेनकाब करते दिखी।

 

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#लेखक
संदीप चौरसिया
राजनीतिक विश्लेषक, एवं स्तंभकार

है।।

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